बेहसा करते हम दिल की पात राह में कब से हम तेरे साथ
गहरी रोत को धम जाने दो गहरे खोबों को दोहराने दो
बेहसा करते हम दिल की पात
सबसे पूछल क्यों बदनाम मैं हर शाम मैं गुम हर वार
दिल के रासत जाते हैं कहां
मैं सब के रासत जाते हैं कहां
रूल के बैठा हूँ या एक बार कर रहूँ तुम्हाँ को या राहूँ है कब से हम तेरे साब।
नहरी रात को धम जाने दो मेरे खाब को दहराने दो इसा करते हम दिल की बार।
हम दिल खोल के रोते हैं कभी फिर सब भूल के हसते हैं कभी।
सब को है खबर हम बरबाद हैं।
रस्टे हैं कभी।
अत्मों में घिरे हम बताव हैं बेकदर नहीं।
है मेरा प्यार ना हमें कब से हम तेरे साब।
नहरी रात को धम जाने दो।
मेरे खौबों को दहराने दो।
एसा करते हम दिल की बार।