प्रिये भक्तों प्रेम से बोलिये राधा राणी सरकार की
प्रिये भक्तों आज हम आपको बरसाने की होली की पावन कथा सुनाने जारे हैं
फागुन के रंग बिरंगे माऊसम में यह दिवहार
सम्पुर्ण भारत सहित विदेशों में भी मनाये जाता है
यूतो होली सभी लोग एकी तरीके से मनाते हैं
हम बरसाने की होली की पावन कथा सुनाते हैं
हाँ
हाँ
प्रिय भक्तों होली का तिवहार फागुन के माह में मनाये जाता है,
जहां सभी जूमते गाते आपसी वैरभाव को भूल कर एक दूसरे से गले मिलते हैं
और खुशिया मनाते हैं
प्रेम से भरा ये परब है होली
फागुन माह में आये
बिन बिन रंगों में डूब कर
लोग सभी हरसाए
लोग सभी हरसाए
एकतका प्रतीक ये पावन होली का तिवहार
सबके मन को मोह लेती है
रंगों की ये पुहार
यूतो होली पंचमी तक ही होती बतलाए
लेकिन ब्रजमंडल में होली चालिस दिनों मनाए
सबसे पहले लड़मार होली
होती बतलाए
ये होली
रादा मंदिर में आयो जित करवाए
लड़मार होली की तुमको जलक दिखाते हैं पावन कता सुनाते है
है कितने प्रकार की होली तुमें बताते है हम कता सुनाते है
होली केले नदलाए ओरे ब्रजमें रंग गुलाए
ब्रजरसीया करेगमाए रंग दारे गोपी बाए
प्रिये भक्तों वैसे होली का कियोहार पंचमी तक मनते हैं
कितने प्रकार की हुआर गुलाए बड़ों जीवन बादरी के दाइवाड विए जानते हैं
नदलाए ब्रजमें यह तुमको जलक तुमें बताते है हम कता सुनाते है हां
राधा राणी जी के मंदिर में आयोजित की जाती है
श्री जी के भक वरसाने में
...
राधा राणी के मंदिर की उपल करते हैं
और नीचे भकतों के उपर लड्ढू फेखते है
मंदिर के उपल छत छाँजो पे सब लोग ही चड जावे
लूट लूट के लड़ू गूज़री लप लपा लप खावे
किसी के मूह में रस्गुल कोई
लड़ू ठूस रहा है
कौन गाम ते आई भोजी गौलो पूछ रहा है
रस्गुले की चासनी में बिगडी है किसी की सारी
किसी के कपड़े किसी के लटे कपड़े किसी के फारी
लड़ू मिठाई की आह भईया हो रही लूटम लूट
लड़ू लूट के खाते हैं बरसाने की होली
की हम कता सुनाते हैं हम गाता जाते हैं
ओडि केले नदलाद ओडि व्रज में रंग गुलाद
व्रज रसीआ करे तमाद रंग दारे गोपी वाद
प्रिये भक्तों बरसाने में श्रीजी को बाल स्वरूप में पूजा जाता है
इसलिए लोग बिस्केट,
फल,
टौपी,
खिलोने आदी प्रसाद के रूप में बातते हैं और
यह कारक्रम करीब दो घंटे तक चलता रहता है
प्रिये भक्तों द्वापर युग में नंध गाउं
में बरसाने से निवता पहुचाया जाता था
तब नंध गाउं के हुरियारे अर्थात पुरुस
ब्रजभान जी के यहां होली खेलने जाते थे
और यह परमपरा आज भी चली आ रही है
राधा जी के यहां बाल स्वरूप में होने
के कारण बच्चों का भी ध्यान रखा जाता है
राधा को यहां बाल स्वरूप में माने सभी बताएं
इसलिए बच्चों को यहां टौपि बिसकिट बट वाईं
तापी
विस्कित बटवाईं
खाने की
वस्तु या खिलोने यहाँ पे फेके जाते
भक्त लोग परसाद समझ कर लूट लूट कर खाते
बरसाने से नंद गाउं में होली का नियोता देते
नंद बाबा जब यह नियोता सुईकार है कर लेते
तब विश्वान के यहाँ यह होली
दूमधाम से मनाते
परम्परा तब से ही चली है बृजवासी बतलाते
लड़ुमार होली का किस्स तुम्हें बताते हैं पावन कथा सुनाते हैं
बरसाने की होली की हम कथा सुनाते हैं हम गाथा जाते हैं
वरसाने में आते हैं यहाँ इनका सामना बरसाने की गोपियों से होता है
और वहाँ की गोपिया भी हाथों में डंडे लेकर पहले से ही तयार रहती हैं
नंद गाओं के हुरियारे धाल लेकर आते हैं और डंडो
का बार रुकते हैं और फिर शुरू होती है लट मार होली
अगले दिन फिर खेली जाती है लट मार ये होली
शाम को चार बजे से गोपिया गॉले करे थिटोली
नंद गाओं के हुरियारे सब बर्साने में आए
उनका सामना गोपियों से होता है ये बतलाए
गोपिया तो पहले से ही
बेटी होके तईयार
हाथ में डंडे
लेके गोपिया कर रहें इंतजार
दे दना दन लठ गुजर या गॉलों पर बर्सावे
तसलों की फिर ढाल बना कर गॉले जान बचावे
कैसे बचें गोपियों से गॉले सोंचते जाते हैं
वो तो सोंचते जाते हैं बर्साने की होली की हम कता सुनाते हैं
यह शुरुवात विरिशभान के महल से होती हुई
रंगीली तक और फिर राधा जी के मंदिर तक होती है
यह होली बड़ी ही आननद में ही होती है
बर्साने की गोपिया इतनी दबंग होती है
कि नंद गाउं के गॉले इनका सामना मुश्किल से कर पाते हैं
तो आईए इस लट्ढमार होली की आपको चलत दिखाते हैं
इस होली में कितना है
आननद तुम्हें बतलाए
सूज फूल गए सारे गॉले हाई हाई चिल्लाए
हाई हाई चिल्लाए
दुबले पतले गॉले मोटी तग्डी सभी गुजरिया
गॉले बगल में दबा लिये तो तूटी सब की पसुरिया
धोती फार रुमाल बनाया फारे उनके कपडे
किसी की तीठ पे लटः बजाये बाल हैं उनके उकारे
बाल हैं उनके उकारे
ओले हुडंगे भागो बेटा भागो
गोपीयों की तोलियों से बचके नहीं है तुम जा पागे
कीचर से मुख बिगड कोई पहचान नपाते हैं
बरसाने की होली की हम कता सनाते हैं
तोली केले नंदलाद ओडे व्रज में रंग घुलाद
व्रज अस्तिया करे गमाद रंग दारे गोपी बाद
ये श्रीराधे भक्तों अगले दिन ऐसी लठमार होली नंदगाओ में
भी खेली जाती हैं बरसाने की हुरियारी होली खेलने नंदगाओ
जाते हैं अब आता है फूलों की होली का नंबर यह होली वरिंदावन
में बाके विहारी जी के मंदर में शाम चार बजे से खेली जात
लाल की नंदगाओ और बरसाने की हुली बड़ी सुहानी
ब्रजमंडल के हुली की तो दुनिया है दीवानी
वरिंदावन में बड़ी प्रसित है फूलों की यह
होली बाके विहारी जी मंदर में सजती है यह तोली
सजती है यह तोली रंग विरंगे फूलों से धक जाते बाके विहारी
शाम को चार बजे से ही हो जाती है तैयारी
भक्त हजारों बाके जी पर देखो फूल बरसाए
फूलों की होली का देखो सब आनंद उठाए
सब आनंद उठाए
फूलों से मंदिर के द्वारे महक ही जाते हैं
सब जूम के गाते हैं बरसाने की होली की हम कता सुनाते हैं
हम गाता गाते हैं
ओली के लेन बिलाज ओले व्रज में रंग गुलाज
व्रजल सिया करे कमाज रंग दारे गोपी वाज
गोपिया चड़ी को हाथ में लेकर आये बनाकर टोली
गौलों को ये चड़ी मारती पीछे पीछे भागे
इस होली की शोब निराली बड़ी ही सुन्दर लागे
श्री कृष्ण को बाल रूप में यहाँ है जाना जाता
इसलिए ये चड़ी मार का परव सभी को भाता
जब काना माखन को चुराते लीला ऐसी रच्चाते
गोपीया जब है चड़ी उठाती काना भाग है जाते
चड़ी मार होली का उत सब सभी मनाते हैं
लीला शाम दिखाते हैं
बरसाने की होली की हम कथा सुनाते हैं हम गाता जाते हैं
जैश्री गोपीनात प्रियाई भक्तों फूलों की होली
के बाद फिर होती है विदवा और वृधाओं की होली
जो गोपीनात मंदर में मनाई जाती है यह एक ऐसी अद्भुत
होली होती है इसे देखने वाले की आखों में आशु आजाते हैं
यह होली आप सभी को अवश्य ही देखनी चाहिए
इस होली के साक्षी स्वेम गोपीनात भगवान होते हैं
यह होली विशेश महत्तपूर्ण होती है
विदवा और वृधाओं की अब होली तुम्हें दिखाएं
जो देखे ये होली आखों में आशु भर भर आएं
गोपीनात होते हैं साची इनके तुम्हें बताएं
इनके सारे कश्टों को तो गोपीनात जी मिठाएं
जी के मंदिर में होती है ये होली
गोपीनात दुख दर्द मिठाते बरते सब की जोली
बरते सब की जोली ब्रज बरसाने की होली में ये है सबसे न्यारी
इस होली का हाल देख वेचावे दुनिया सारी
अब मतुरा की होली की तुम्हें जलक दिखाते हैं परद्रिश दिखाते
हैं बरसाने की होली की हम कता सुनाते हैं हम गाता जाते हैं
हम गाता
जाते हैं
अब श्री राधा कृष्ण की होली का चमतकार भरी लीलाओं को बताते हैं
यह कहानी एक ऐसे संत की है जिसने श्री राधा राणी के रंगों में कैसे
इत्र को भोला और यह इत्र एक सेट को दे दिया और कैसे उनके पास पहुचा
इस कहानी में राधा कृष्ण की होली का
अपनी आँखो देखा वरनन आपके सामने करता हूँ
राधा कृष्ण की होली का एक किस्सा तुम्हें
सुनाएं राधा जी के रंग में खोला कैसे इत्र बताएं
एक गाओं में रहते थे एक सन्यासी बतलाएं
इस सन्यासी बाबा के थे कई शिस बतलाएं
एक सेट था इनका चेला जगतराम था नाम
इत्र बेचने का करता था इसी शहर में काम
इसी शहर में काम
कथा सुनाते हैं हम कथा गाते हैं
ओरी केले नंदलाद ओरे ब्रज में रंग गुलाद
ब्रज रस्तिया करें कमाद रंग दारें गोपी बाद
जय स्री क्रिष्ना
सेट जी जब यमना पर संत के पास आये
तो देखा संत महराज यमना जी के जल में
खड़े हैं और कुछ देख रहे हैं
सेट उस सन्यासी को एक इत्र की शीशी भेट करते हैं
मगर सन्यासी ने उसे सुमहा तक नहीं
और उस इत्र की शीशी को यमना जी में ही उडएल दिया
सेट यह देखकर बहुत दुखी हुआ और अपने घर लोट आया
आगे क्या होता है आईए कथा के माध्यम से जानते हैं
इत्र की शीशी सेट जी ने संत के हाथ थमाई
यमना जी में शीशी उडएली संत ने कला दिखाई
संत ने कला दिखाई
यमना में क्यूं इत्र उडएला सेट समझ ना पाया
हुआ उदास वो सेट लोट कर अपने घर को आया
अपने घर को आया
संत की महिमा संत ही जाने मन ही मन सोचे
दूजे दिन फिर वही सेट सन्यासी के घर पहुँचे
सन्यासी के घर पहुँचे
सन्यासी भगवान भजन में अपना ध्यान लगाए
सेट के आने की आहट सुन संत खड़े हो जाये
खुश हो के सन्यासी सेट जी से फरमाते हैं
अपनी बाते बताते हैं
वर्साने की होली की हम कथा सुनाते हैं
हम गाता गाते हैं
जय
श्री कृष्णा प्रिये भतों
जब सेट जी सन्यासी की कुटिया पर पहुचे तब संत महराज प्रसंद
होकर कहने लगे अरे तुम्हारा इत्र तो बहुत काम आया तब
सेट चकित होकर बोला महराज मैं तो कुछ समझा नहीं तब संत ने
कहा अरे उस दिन क्रिश्ण और राधा राणी की होली हो रही थी �
यह इत्र पिछकारी के द्वारा श्री क्रिश्ण के ऊपर उनके शरीर में मिल गया
और वो इत्र की खुश्मु से महकने लगे
तुम्हारे इस इत्र ने राधा राणी की होली में एक नया रंग भर दिया
और तुम्हारे कारण मुझे भी उनकी कृपा प्राप्त हो गई
राधा क्रिश्ण की होली में जब सेठ का इत्र मिलाया
इसी रंग से राधा जी में कानवा को है भिगगाया
महक उठा श्री क्रिश्ण का तनमन ऐसा रंग लगाया
संत की इस वाणी को सुनके सेठ समझ ना पाया
अगर भरोसा नहीं है तुमको एक बात बतलाए
श्री क्रिश्ण के जितने मंदिर मथुरा को तुम जाए
जितने मूर्ती हैं भगवान की सारी महक रही हैं
प्रभू के मुख मंडल पे तेरी भक्ती चमक रही है
भक्ती चमक रही है
देखने सेठ जी मथुरा जी को आते हैं श्रिक्रिश्ण के मंदिर जाते हैं
बरसाने की होली की हम कथा सुनाते हैं हम गाता गाते हैं
होली के लें नदलाज पोड़े बज में रख गुलाज
बजरस्तिया करें कमाज रधधारें गोबीबाद
जै श्री राधे भक्तों सन्यासी ने कहा तुम्हें मेरी बात पर भरूसा नहीं है
तो तुम मथुरा के जितने भगवान श्रिक्रिश्ण के मंदिर हैं वहाँ जाकर देखो
उनकी सारी मूर्तियां इत्र की खुश्बू से महक रही हैं
तब सेठ मथुरा गया और जितने भगवान श्रिक्रिश्ण की मूर्तियां देखी
सारी उसी खुश्बू से महक रही थी
तब उस सेठ को यकीन हो गया और वो खुशी में जूब उठा
उसकी आँखों से आँस्वों की धाराएं बहने लगी
उस सेठ का इत्र राधा कृष्ण ने सूइकार कर लिया
सेठ फिर संत की पुट्या में वापस आ जाता है
राधा कृष्ण ने इत्र सेठ का कर लिया था श्वीकार
खुशी से जुम उठा वो सेट फिर बोले जै जैकार
संत की कुटिया पर वो सेट जी लोटक जब है आया
चर्णों में सिर जुका दिया आकों से नीर बहाया
भावक हो गए सन्यासी
आखें उनकी भर आई
श्री कृष्ण राधा की होली की महिमा समझ़ाई
वैरागी ने लिखी ये रचना देव सकुंदन गाए
भेद भाव को भूल प्रेम से होली सभी मनाए
होली सभी मनाए प्रेम भरे रंगों में आओ हम
रंग जाते हैं ऐसा गुलाल उडाते हैं बरसाने की
होली की हम कथा सुनाते हैं हम गाथा गाते हैं
ओड़े व्रज में रंग गुलाल नजल सिया करें कमाल
रंग दारें गोंपी वाल
श्रिमन नारायन नारायन प्रिये भक्तों
आप सभी ज़िन्दे जाते हैं
सुद्ध साफ रंगों को लेकर प्रेम से होली खेलो
केसर की खुश्बू को भक्तों अपने हिरदे में घोलो
होली के
पावन तेवहार पे गुजिया पापड खाओ
मित्रों के संग बैट के प्यार से ये तेवहार मनाओ
किसी का तुम से दिल ये दुखे ना इतना रखना ध्यान
आज के दिन तुम बाटो मिठाई सब का करो संवाल
आओ दिलों के जीतने का तेवहार मनाते हैं हम खुशिया लुटाते हैं
बरसाने की होली की हम कथा सुनाते हैं हम गाता गाते हैं
ओडि खेले रंगलाद ओडि ब्रज में रंग दुलाद
बजरस्तिया करे गमाद रंग तारे गोपी बाद
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