यही चैत के महीना में
हाँ
एगो सोहागी
हाँ
सरोखो सिंगार कोके सेज़ पर बैठल बाड़ी
हाँ
बलमुआ घरे ने इखन बाहर में बाड़े
याद आयी लहा
हाँ
सक्ही से कहता री कि ये सक्ही
कह हो
हम अपना दिल के हाल का कहें
दिकत बतावा
बड़ा दुख बना
का
कहती है बेचारी
का
जैते में बाहर आ गईले
पिया हम के त्यागी
जरता जमानी जैसे चैली के आगी रे बालम लागी
रतिया में याद कोके जागी
रे बालम
लागी रतिया में याद कोके जागी
आओ अपना अपना पराइप कोंचो दले की तारे परिणा
आओ परिणच प्या बुअ तो नहीं है
जियालाल बाबाजिया
अपने सिवा इसके लोई परिहांग नमजा मारफ भाव
प्रेबल मुझा लागी रतियां भे याद कोई जागी
आमावा
महुआवा हरी और भोईल का चानार हो आहमारा जवानी में परलबास सुखार हो
आहमारा जवानी में परलबास सुखार हो
उनका कमया लुथी से दागी
मन करे घर छोरी जाई कही भागी
रेबल मुझा लागी
रतियां भे याद कोई जागी
रेबल मुझा लागी रतियां भे याद कोई जागी
हाँच ले जूए
वाला नई कहे के हुँ दालो गुलो गुलाबा
रोषन पर दूमन भैले गुलरी के फुलाबा
जूए वाला नई कहे के हुँ दालो गुलो गुलाबा
रोषन सिकंबर भैले गुलरी के फुलाबा
लागे उनकर ठीक नै कहे हालत दिमागी बारे ममुरा इल जैसे
सरसोक्य सागी रेबल मुझा लागी रतियां भे याद कोई जागी
रेबल मुझा लागी रतियां भे याद कोई जागी
रेबल मुझा लागी रतियां भे याद कोई जागी