अपने दोनों चले गया दूर तक
सुनहरी ज्जाडियों की उठ लेगे
तिलिस्मी जिंगरों से बोट लेगे
के गहरे पानियों पे बोट लेगे
अपन दोनों चले गया दूर तक
सुनहरी ज्जाडियों की उठ लेगे
तिलिस्मी जिंगरों से बोट लेगे
के गहरे पानियों पे बोट लेगे
अबन दोनों जले गया दूर तक
अबन दोनों खुदा की तितलियां हैं
जो गाओं से शहर को आ गई हैं
गड़ी के फूल पे मंडला रही हैं
मशीनों से जो सर तक्रा रही हैं
अबन दोनों खुदा की तितलियां हैं
अबन दोनों महबत कर रहे हैं
जब ही एक दूसरे को भागता
भर रहे हैं
जुदा होने से लेकिन डर रहे हैं
खुदा की चाह में जी मर रहे हैं
अबन दोनों महबत कर रहे हैं
अबन दोनों महबत कर रहे हैं