शीतल चंदा अगड़ा बन गई फूल
प्यार न करना हूँ किसी से प्यार है मन की
आंग वतने से कब से प्यार है मन की
आंग वतने से कब से प्यार है मन की
आंग वतने से कब से प्यार है मन की
आंग वतने से कब से प्यार है मन की
आंग वतने से कब से प्यार है मन की
आंग वतने से कब से कब से प्यार है मन की
अखेड़े राह तकत होती हमारे राह तकत होती हमारे
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