नित प्रातः उठ तुम्हे ध्याते हैं और भजन सुनाते हैं
पाहिंसा के पालक प्रभुवर
तुम्हे शीष जुकाते हैं
नित प्रातः उठ तुम्हे ध्याते हैं
नित प्रातः उठ तुम्हे ध्याते हैं
जोटी कपट से दूर रही भाक्ती में सदचूर रही
प्रभुवर तुम्हे शीष जुकाते हैं पाहिंसा
के पालक प्रभुवर तुम्हे शीष जुकाते हैं
नित प्रातः उठ तुम्हे ध्याते हैं
नित प्रातः उठ तुम्हे ध्याते हैं
तुम्हे शीष जूकाते हैं
तुम्हे जो सत्य के
मार्ग चले अनू सरण हम वही करें
नित प्रातः उठ तुम्हे ध्याते हैं
मोह माया की जो बनधन है उसी तोड की
आती हैं
नित प्रातः उठ तुम्हे ध्याते हैं
नित प्रातः उठ तुम्हे ध्याते हैं
नित प्रातः उठ तुम्हे ध्याते हैं
नित प्रातः उठ तुम्हे ध्याते हैं
नित प्रातः उठ तुम्हे
ध्याते हैं
नित प्रातः उठ तुम्हे
ध्याते हैं
नित प्रातः उठ तुम्हे ध्याते हैं