सरस्वती माता ज्ञान की देबी देना हमको इतना ज्ञान
बसंत पंचमी तिथी है पामन जिसकी गाथा करे बखान
सोनी साहनी आलहा गाए स्रधालूजन देना ध्यान
तीन फरवरी सन पचीस की तिथी है सुनलो बड़ी महान
वैसे तो माघ महीने में बसंत पंचमी हो हर साल
दो हजार पचीस को लेकिन करे पंचमी हमें निहाल
एक सो चोबिस सालों में आई ये तो है जी बड़ी कमाल
गंगा में डुब की मारे तो
उन्य से
होंगे माला माल
गंगा में डुब की मारे तो
गंगा में डुब की मारे तो
उन्य से
होंगे माला माल
बसंत पंचमी मना रहे हम
यहाँ पुराणो के अनुसार
द्रंभ कमंडल से कहते हैं
लिया सरस्वती ने अवतार सरस्वती भी जब प्रकट भाई तो
बजने लगे बीड़ा के तार बड़ी मोहनी मधुर रागिनी
मुग्ध हुआ सारा संसार देव मुनी नर सादु संत भी
करने लगे हैं मा की पुगार कहते हैं सारी स्रिष्टी में
होने लगा सुख का संचार देवी सरस्वती जी के नाम से
लगे मनाने हम तेवहार इस दिन करने लगे वंदना
करे आगमन बसंत बहार इस दिन करने लगे वंदना
करे आगमन बसंत बहार कला और संगीत की देवी ज्यानक है अद्भुत भंडार ज्यान और मूरक जन कहते
लेना माता हमें निहार थोड़ा ज्यान हमें मिल जाए हो जाए मेरा उधार ज्यानक तीप जला दो माता
दुख का दूर करो
अधकार बड़े बड़े ज्यानी महज्ञानी ज्यान के आपस सदा मनाए जिसकी जिहवा में तुम बैठो
बनते काउम दे विगान जिसके मस्तक यान बिराजे उनकी वाड़ी अमरित पाए इसलिए तो देव देवियां
सबसे पहले आपको ध्याए इसलिए तो देव देविया
इसलिए तो देव देविया सबसे पहले आपको ध्याए
पुम्भन पड़ गई वसंत पंचमी
बढ़ियां से त्योहार मनाई कैसालों में घड़ी ये आई
चलिये हम आनन्द उठाए प्रयाग राज में महा कुम्भ है
आप सभी को हम बतलाए तीन फर्वरी सोमवार है
अमरित पर्व महान कहा संगम तट पर चलो चले हम
आस था की डुब की लगाए
लोग विदेशों से भी आए
हम पर्व को चूके नाए बड़े भाग से मौका पाए
जिसमत वाले हम कहलाए देश में रहकर नहीं पहुँचे जो
हमको तो धिकार कहाए देश में रहकर नहीं पहुचे जो
हमको तो धिकार कहाए देश में रहकर नहीं पहुँचे जो
हमको तो धिकार कहाए महा कुंभ पैतालिस दिन का
एक बार फिर याद दिलाए छबिस फरवरी तक है मेला
कभी तो एक बार भी आए जीवन का कोई नहीं ठिकाना
कौन घड़ी कब क्या हो जाए सामने अपने वसंत पंचमी
इस बेला में डुब की लगाए पड़ी ही पावन संगम भूमी
इरिवेनी है जो कहलाए यहां मिली है गंगा जमना
और सरस्वती माई बताए गंगा जमना सबको दिखती
सरस्वती देवी दिखती नाए मिली धरातल में दोनों से
गहराई से बहती जाए मिली धरातल में दोनों से
मिली धरातल में दोनों से गहराई में बहती जाए
बहुत ही ज़्यादा महत्त इनका
बुद्धी माता ये कहलाई जिनको बुद्धी मिलती इनसे
बड़ो बड़ो को खेल दिखाए पड़े पड़े दवलत वालो को
बुद्धी वाले रहे घुमाए दे नहे माता सरस्वती को
सरस्वति का वर्दानव पाए तिर्वेनी का संगम पावन
धारा तीर्थ पावन कहला आज तीर्थ छेत्र की किसी भी धारा
परस्रद्धलु जन जहां पे आए वहीं पे वो यशनान बना कर
महा कुम्भ का पुन्य कमाए दूर दूर तक ये भूमी तो
दूर दूर तक ये भूमी तो पवित्र भूमी है कहला
याद करे हम मौनी अमावस, मौन अमावसया बन जाए
बड़ी भूमी है कहला
मयानक भगदड मच गई
तांडव मोत्र ही दिखला
कितने घर के दीपक बुझ गए
उजडी मांग काई बतला
घायल कितने लोग हो गए
गिंती कोई नहीं बताए
हुए लोग गुम सुदा हजारो
घर को लोटे ना कहला
खोया पाया केंद्र है लेकिन
भीड यहाँ दिन रात बताए
बिछड गए है जिनके परिजन
उनका कैसे पता लगाए
दिल में दर्द आख में आशो
यहां से वहां भटकते जाए
दिल में दर्द आख में आशो
यहां से वहां भटकते जाए
कभी न ऐसी घटना घटी थी
ये हालात बिगड़ते न
सद्धालू ना मारे जाते
समाचार हमको बतलाए
अठा इसको संगम तट पर
सामक जो पहुँचे कहलाए
जादा से जादा सद्धालू
वहां से वापस लोटे न
जाने वाले जाते रहे हैं
पल पल भीड़े को रहे बढ़ाए
संगम पर रह गए लाखो
वहीं पे डेरा लिये जमाए
शाही अमरित संत जनो का
तब होगा दर्शन बतलाए
रात में लगभग एक बजा था
रात में लगभग एक बजा था
संगम पर आने जाने का
एक रास्ता रहा बताए
भीड़े हुई आपे के बाहर
भगदल भारी मची कहाई
जो सो एथे संगम तट पर
वहां गिरे तो उठ ना पाए
जाने वाले अगर जो आते
आलत कभी बिगड़ते नाए
संगम का हम लालत छोड़े
कहीं भी हमें असनान बनाए
करके आली शाने बेवस्था
दिया प्रसासन ने बतला
सद्धा लूजन धीरज खोकर
दाग यहाँ पर दिये लगा
तीन फरवरी बसंत पंचमी
ये गलती फिर ना दोहरा
तीन फरवरी बसंत पंचमी
ये गलती फिर ना दोहरा
पांच परव अमरित बेला के
बसंत पंचमी तित्य कहाई
इसके बाद मैं माघ पूरी मा
जो बारा फरवरी को
आई छब्बिस फरवरी पांचवी बेला
शिव रात्री ते ओहर मनाए
इतने दिन है किसी रोज भी
यहां पिया के पुन्य कमाए
सासन और परशासन ने जो
अर्बो रुपिया दिया लगा
यहां हजारों पार करता
दिन और रात जुटे कहला
घटना इतनी बड़ी घटी जो
किसी किशा जिस भी हो जाए
लिखानी रंजन शैनने आला
सोनी साहनी प्रेमस गाए
लिखानी रंजन शैनने आला