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Bài hát 26 january ki katha do ca sĩ Devesh Kundan thuộc thể loại The Loai Khac. Tìm loi bai hat 26 january ki katha - Devesh Kundan ngay trên Nhaccuatui. Nghe bài hát 26 January Ki Katha chất lượng cao 320 kbps lossless miễn phí.
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Lời bài hát: 26 January Ki Katha

Lời đăng bởi: 86_15635588878_1671185229650

जै हिंद जै भारत
आप तमाम देशवासियों को गणतंत्र दिवश की हारदिक शुभ काम लाएं
प्रतेक वर्स 26 जनवरी के दिन हमारा राष्टियत वर्व गणतंत्र दिवश के रूप में मनाय जाता है
यही वो एतिहासिक दिन है जब आजादी के बाद सन 1950 को भारत का संविधान लागू किया गया था
तो आईए आज इस यादगार दिन तक पहुचने की पूरी कहानी हम आपको विष्टार से बताते हैं
हम भारत के गणतंत्र दिवस की कथा सुनाते हैं पावन कथा सुनाते हैं
चान से प्यारा धजीय तिरंगा हम लहराते हैं हम कथा सुनाते हैं
हम भारत के गर्णतंत्र दिवस की कथा सुनाते हैं, पावन कथा सुनाते हैं
जान से प्यारा धोजिय तिरंगा हम लहराते हैं, हम कथा सुनाते हैं
है रिंब के प्रजान, गर्णतंत्र दिवस की कथा सुनाते हैं, जान से प्यारा धोजिय तिरंगा हम लहराते हैं
प्रिये देशवासियों हमारा यह देश हमेशा वीर शहीदों के प्रती कृतग्य रहेगा
जिन्होंने इस देश की आजाधी के लिए अपने प्राणों की आहुती दे डाली
उनकी शहादत का ही ये परिणाम है कि हमें एक आजाध देश मिला और फिर हमने बनाया अपना नया सम्विधान
जैहो जैहो वीर जवानों नमन तुम्हे करते जान गवा कर दी आजाधी हम वंदन करते
हम वंदन करते
इस दिन देश का सम्विधान
लागू किया गया
एकता और भाई चारे का परिछै दिया गया
परिछै दिया गया
स्वतंत्र देश का गनः रच्च भारत ने पाया था
एक ही झंडा एक ही नारा ये अपनाया था
ये अपनाया था
इस दिन वीर सभूतों को
हम करते हैं नमन देते हैं स्रधाँचली उनको सुमन करें अरपन
सुमन करें अरपन
जगह जगह ध्वजवंदन राश्ट ये गान को गाते हैं पावन कथा सुनाते हैं
जान से प्यारा ध्वज ये तिरंगा हम लहराते हैं हम कथा सुनाते हैं
प्रिय देशवासियों सम्विधान बनने से पहले
सभी राजनेताओं ने मिलकर बैठक की
और इस बात पर विचार किया गया
कि अध्यक्ष किसे बराय जाए
और सम्विधान तैयार कौन करे
इसके बाद क्या हुआ
आई ये सुनते हैं कथा के माध्यम से
आजादी के बाद तो विद्वानों ने ठाना है
सम्विधान हो अपना भी ये सब ने माना है
फिर नेताओं ने मिलकर एक गठन बनाया है
डॉक्टर राजन्द्र प्रसाद को अध्यक्ष बनाया है
नौ दिसंबर उनिस सच्यालिस का आया शुब दिन
काम शुरू हुआ सम्विधान का फिर तो दिन गिन गिन
भीम राव को पांडुली पिका तब अध्यक्ष बनाये
सम्विधान के निर्माता की है पहचान दिलाये
सबसे बड़ी कानोन की पुस्तक तब हम पाते है
पावन कथा सुनाते है
जान से प्यारा धजीय तिरंग
गया हम लहराते हैं हम कथा सुनाते है
है जिन्द की पहचान प्रदंप्र दिवस्य महार
छाइश जनवरी के दिन बना भारत का सम्विधान
प्रिया देश वास्थ्यों
डॉक्टर भीमराव अम्बेडकर डॉक्टर राजेद्र प्रशास और देश के सभी प्रमुख नेतागन सम्विधान को लागू करने में जुट गए
लेकिन फिर भी लगभग दो साल का वक्त लग गया
आईए इस घटना को हम संगीत में कथा के रूप में सुनकर आनन्द लेते हैं
दो वर्स ग्यारह महिने फिर अठारह दिन में
बन के सामने आया कानुन उनपावन दिन में
उनपावन दिन में
छबिस नवंबर उनिस सो उनचास है फिर आया
फराजन प्रसावन
दिन सभास फिर है सम्विधान पाया
छबिस नवंबर सम्विधान का पर्व मनाते हैं
देश के नौजवानों को वो याद दिलाते हैं
छबिस जनवरी कानुन का फिर शुब दिन माना है
देश के सामने लाने
का फिर सब ने ठाना है
क्या हुआ था छबिस को हम वो बतलाते हैं
पावन कथा सुनाते हैं
चान से प्यारा धजी तिरंगा हम लहराते हैं
हम कथा सुनाते हैं
है इंद के बढ़ जान बढ़ बंद दिवसर महार
इस जनवरी के दिन बना भारत का संभिताओ
प्रिय देशवासियों इस तरह से छबिस जनवरी के शुब दिन में
प्रतेक वर्ष गनतंत्र दिवस मनाये जाने लगा
इस तरह हमारा देश दुनिया का सबसे
बड़ा प्रजातांत्रिक देश बन गया
आईए कथा के माध्यम से जानते हैं
गनतंत्र दिवस हम छबिस जनवरी को ही मनाते हैं
पूर्ण स्वराज का हम सब वीरों ध्वज लहराते हैं
अपना लहु बहाकर वीरों ने दी है आजादी
इसकी गवाही देशों
देती है हिमालय की वादी
इस तिथी का फिर तो सब ने ही रखा सम्मान
उनिस सो पचास में आया अपना संविधाई
तब से अब तक छबिस को गनतंत्र मनाते हैं
छबिस जनवरी को हम सब ही
जश्ण मनाते हैं
आब सब जश्ण मनाते हैं
और कुछ बंगश की तüne का ये सब से बडा गनतंत्र बताते हैं
प्रजातंत्र बताते हैं
चान से प्यारा खजिय तिरंगा हम लहराते हैं
हम कथा सुनाते हैं
है रिम्ब के पहचार रणपंट दिवसर महार चारिश जनवरी के दिन बना भारत का सम्विधान
प्रिया देशवासियों जब हम भारत के सम्विधान का चिकर करें तो इस देश की दूसरी खास बातों को भला कैसे नजरंदाज कर सकते हैं
तो आईए आगे सुनते हैं हमारे देश भारत की महिमा क्या है
सारी दुनिया भारत को अतिपावन कहती है गंगा मैया भारत की भूमी पर बहती है
देव भूम है भारत मेरा वेद बताते हैं भारत को सब भारत माता कहके बुलाते हैं
राम कृष्ण यहां भीर शिवाजी लाखों है जन में हिंदू, मुसलिम, सिख, इसाई के हैं यहां कुन्बे
एक तशक्ती शान हमारी सब बतलाते हैं संगठन है एक देश में यह बतलाते हैं
यह बतलाते हैं
राम कृष्ण यहां भीर शिवाजी लाखों है जन में हिंदू, मुसलिम, सिख, इसाई के हैं एक तशक्ती शान हमारी सब बतलाते हैं एक देश में यह बतलाते हैं
प्रिया देशवासियों हमारा देश विविद्धिता में एकता का प्रमाण है अनेक भाषा एवं छित्र की भिन्नता के बावजूद भारत एक है और सर्वस्रेष्ट है बोलिये मा भारती की
अपने देश का कानूँ
हम सब अपनाते हैं
राष्ट द्वज्ज के आगे गर्व से शीश जुकाते हैं
गर्व से शीश जुकाते हैं
अमर कहानी उनकी आज भी देश ये गाता है
जिये है जोगण तंत्र को ये इतिहास बताता है
लाखों भूल चमन में महके
के ऐसा हिंदुस्तान एक दूजे की खुशी से खुशिया पाता है इनसान
बड़ी मधुर और बड़ी रसीली देश की वाणी है
बेश और भूशा रंग रंगीली बड़ी सुहानी है
मिल जुलकर हम इद दिवाली सब ही मनाते हैं हर परव मनाते हैं
चान से प्यारा थजी तिरंगा हम लहराते हैं हम कथा सुनाते हैं
है इंद के बहचार परदंपर दिवसर महार छान इस जनवरी के दिन
बनाओं
प्रिय देशवासियों आज हमारा फर्ज है कि हम न सिर्फ इस सम्विधान का बल्कि सभी वीर सहीदों का मान रखें
और देश की खातिर मर मिटने को तैयार रहें ये देश महान था है और सदा रहेगा
आज भी लाखों वीर हमारे बने हैं पहरेदार नमन है करता भारत उनको लाखों करोडों बार
रक्त की बूंद बूंद वीर की बली बली जाती है
शान तिरंगे की चोटी पर तब लहराती है
नाहिम्मत तुष्मन जो हमसे आख मिलाएगा
पलक मारते पल में मिट्टी में मिल जाएगा
देवे सुकुंदन ने गणकंत्र की कथा सुनाई है
मुनिंद प्रेमिज शुमिर शार्दा कलम चलाई है
कलम चलाई है
प्रेमतने जैहिंद कनारा मिलके लगाते है
मिलके लगाते है
जान से प्यारा धुजिय तिरंगा हम लहराते है
हम कथा सुनाते है
है इंधके में जान
दैवे
जब इस जनवरी के दिन बना भारत का संबिदान

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